Monday, November 26, 2018

उपराष्ट्रपति ने रखी करतारपुर कॉरिडोर की नींव, PAK पर बरसे कैप्टन अमरिंदर

सिखों के प्रथम गुरु नानक देव की 550वीं जयंती 2019 में मनाई जानी है. लेकिन उससे पहले ही करतारपुर साहिब का मुद्दा भारत-पाकिस्तान की राजनीति में गर्माया हुआ है. पहले पाकिस्तान ने करतारपुर कॉरिडोर बनाने का ऐलान किया और फिर भारत सरकार ने भी करतारपुर कॉरिडोर बनाने का ऐलान किया.

उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने सोमवार को करतारपुर कॉरिडोर की नींव रखी. इस दौरान केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह, केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल मौजूद रहे.

हरसिमरत ने किया इमरान का शुक्रिया

शिलान्यास से पहले कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर ने कहा कि आज देश में ऐसी सरकार है जिसकी बनाई हुई SIT के कारण 1984 सिखों के दंगों के आरोपियों को सजा मिली. आज कोर्ट ने दो आरोपियों को सजा सुना दी है, वो दिन दूर नहीं जब सभी आरोपियों को सजा होगी. उन्होंने कहा कि 70 साल में देश में कई प्रधानमंत्री आए और गए लेकिन मोदी जी के आने के बाद ही ये कॉरिडोर बनाने का फैसला किया.

केंद्रीय मंत्री ने इस दौरान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान का शुक्रिया भी अदा किया और करतारपुर बॉर्डर के लिए बधाई दी. उन्होंने कहा कि आज गुरु नानक की वजह से दो देश अपनी कड़वाहट भूल कर साथ में आगे आए हैं. मोदी सरकार ने लंगरों से टैक्स लेना बंद किया, 1984 में कत्ल-ए-आम करने वाले आरोपियों को सजा मोदी सरकार ने दिलवाई, गुरु गोविंद सिंह की 350वीं जयंती, जलियांवाला बाग कांड के 100 साल और गुरु नानक देव की 550 जयंती को मोदी सरकार ने बड़े पैमाने पर मनाने का फैसला किया है.

उन्होंने कहा कि यहां का जो काम 70 साल से रुका हुआ था, अब अगर नितिन गडकरी को मौका मिला है तो वह 70 दिन में ही विकास कर सकते हैं.

चार महीने में बनेगा कॉरिडोर

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने इस मौके पर कहा कि जो काम 70 साल से रुका हुआ था, वो अब मुझे करने का मौका मिल रहा है. उन्होंने कहा कि हम करतारपुर कॉरिडोर को चार लेन के तहत बनाएंगे, हम इस काम को 4-4.5 महीने में ही पूरा कर देंगे. उन्होंने कहा कि इस कॉरिडोर के बनने से पंजाब के टूरिज्म को काफी बढ़ावा मिलेगा. उन्होंने कहा कि पंजाब की सरकार हमारे काम में लगातार सहयोग कर रही है.

PAK सेना प्रमुख पर बरसे कैप्टन अमरिंदर

पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने इस मौके पर कहा कि आज सिखों की पुरानी मांग को पूरा किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को इसके लिए शुक्रिया करता हूं. उन्होंने कहा कि करतारपुर कॉरिडोर पर हम गुरु नानक देव के नाम पर एक बड़ा गेट बनाना चाहती है, हम इसका नाम करतारपुर द्वार रखेंगे.

कैप्टन ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख बाजवा को कहा कि अभी वो मेरे से काफी जूनियर हैं, मैं मुशर्रफ से भी सीनियर हूं. हर फौजी को पता है कि दूसरा फौजी क्या सोच रहा है. हम हमेशा अपने देश की रक्षा करना चाहते हैं, लेकिन तुम्हें ये किसने सिखाया है कि आम लोगों को मार दो. लोग अमृतसर में कीर्तन कर रहे थे, और वहां ग्रेनेड मार दिया गया.

अमरिंदर ने कहा कि बतौर सिख मैं चाहता हूं कि मैं करतारपुर साहिब जाऊं, लेकिन मैं मुख्यमंत्री भी हूं यही कारण है कि मैं नहीं जाना चाहता हूं.

Sunday, November 25, 2018

जिसने उन्हें बुलेटप्रूफ़ जैकेट दी, प्रभाकरन ने उन्हीं को मरवा डाला

जिस शख़्स को एक राष्ट्राध्यक्ष और एक पूर्व प्रधानमंत्री की हत्या, श्रीलंका के एक और राष्ट्रपति की हत्या का प्रयास, सैकड़ों राजनीतिक हत्याओं, पच्चीसियों आत्मघाती हमलों, हज़ारों लोगों और सैनिकों की मौत का ज़िम्मेदार ठहराया जा सकता है, उसके लिए एक बात तो आँख मूंद कर कही जा सकती है कि वो निहायत ही ख़तरनाक व्यक्ति था जिसमें जीवट की कमी नहीं थी.

ओसामा बिन लादेन के आदेश पर न्यूयॉर्क का वर्ल्ड ट्रेड सेंटर गिराए जाने से पहले प्रभाकरन के लोगों ने कोलंबो के भीड़ भरे इलाक़े में इसी नाम की उतनी ही प्रतीकात्मक इमारत नेस्तनाबूद की थी.

लेकिन ओसामा की तरह प्रभाकरन एक अमीर माँ बाप की संतान नहीं थे और न ही उन्होंने इस तरह के दुस्साहसी कामों को अंजाम देने के लिए किसी दूसरे देश की शरण ली थी. न ही ऐसे काम करने के लिए उन्हें किसी धर्म से प्रेरणा मिली थी. उनका एकमात्र धर्म था तमिल राष्ट्रवाद.

एक दशक के भीतर उन्होंने एलटीटीई को मामूली हथियारों के 50 से कम लोगों के समूह से 10 हज़ार लोगों के प्रशिक्षित संगठन में तब्दील कर दिया था जो एक देश की सेना तक से टक्कर ले सकता था.

काले पैर वाला शख़्स
साल 1972 में जब वो एक पेड़ के नीचे कुछ लोगों को बम बनाते देख रहे थे तो एक बम में विस्फोट हो गया था और प्रभाकरन बाल-बाल बचे थे.

इस दुर्घटना में उनका दांया पैर जलकर काला पड़ गया था. तभी से उनका नाम 'करिकलन' पड़ गया था जिसका अर्थ होता है काले पैर वाला शख़्स.

चॉकलेट और केकड़ों को उबाल कर खाने के शौक़ीन प्रभाकरन ने अपने अनुयायियों के सिगरेट और शराब पीने और यौन संबंध स्थापित करने पर पाबंदी लगा दी थी.

उनके निज़ाम में एलटीटीई सैनिकों को प्रेम संबंध बनाने की मनाही थी. ग़द्दारी की सिर्फ़ एक ही सज़ा थी, मौत.

उन्होंने अपने दो पुरुष और महिला अंगरक्षकों को सिर्फ़ इसलिए मौत के घाट उतारने का आदेश दिया था क्योंकि उन्होंने संबंध बनाने की जुर्रत की थी.

दिलचस्प बात ये है कि जब अपने ऊपर बात आई तो प्रभाकरन ने ये नियम तोड़ा और मतिवत्थनी इराम्बू से विवाह किया.

कहा जाता है कि उन्होंने प्रभाकरन का पहली बार ध्यान उस समय खींचा था जब होली के त्योहार के दौरान उन्होंने रंगों से भरी एक बाल्टी प्रभाकरन के ऊपर उड़ेल दी थी.

प्रभाकरन का संवाददाता सम्मेलन
अप्रैल, 2002 में उन्होंने 12 साल बाद एक संवाददाता सम्मेलन किया था जिसमें प्रभाकरन की जीवनी 'इनसाइड एन एल्यूसिव माइंड प्रभाकरन' के लेखक एमआर नारायणस्वामी भी थे.

नारायणस्वामी कहते हैं, "हमने लिट्टे के कैंप में रात बिताई. सुबह उठकर कुएं के पानी से नहाए. मैंने 32 साल के अपने पत्रकार जीवन में इतनी सिक्योरिटी इससे पहले कभी नहीं देखी. उन्होंने हम सब पत्रकारों को एक-एक करके कमरे में बुलाया. हमारे पेन, काग़ज़, पेंसिल और नोटबुक को उन्होंने बहुत बारीकी से देखा. बल्कि नोटबुक और पेन तो उन्होंने ले ही लिए."

"हम सबकी उन्होंने अलग-अलग तस्वीर खींची और कैमरामैन से कहा कि वह अपने कैमरों को वहां रखे एक तराज़ू पर रखें ताकि उनका वज़न ले सकें. बाद में हमें पता चला कि उन्हें हर कैमरे का ओरिजनल वज़न पता था. वो ये देखना चाह रहे थे कि किसी कैमरे में कोई ऐसी चीज़ तो नहीं लगी है, जिसकी वजह से उसका वज़न बढ़ा हुआ है. उन्होंने बाक़ायदा हमारे हाथों को दबा-दबाकर देखा कि कहीं इनके मसल्स तो नहीं हैं. कहीं ये प्रशिक्षित लोग तो नहीं हैं, जो पत्रकारों के रूप में वहां आए हैं."

Wednesday, November 7, 2018

गोरखपुर के वनटांगिया गांव में आज दिवाली मनाएंगे सीएम योगी

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरखपुर में वनटांगिया समुदाय के बीच दिवाली मनाएंगे. योगी पिछले कई सालों से उनके गांव आकर दिवाली मनाते हैं और इस बार भी समुदाय के लोग उनके आने को लेकर बेहद उत्साहित हैं. हालांकि, योगी वनटांगिया समुदाय से लगाव काफी पहले से है.

गोरखपुर में मौजूद वनटांगिया गांव तिकोनियां नंबर तीन की रहने वाली 23 साल की शगुनी ने बताया कि हमने महाराज जी के स्वागत के लिये सरस्वती वंदना और सफाई को आधार बनाते हुये गीत तैयार किए हैं. हमारे लिए दिवाली का मतलब महाराज जी (योगी आदित्यनाथ) होते हैं. महाराज जी ने जब से आना शुरू किया तभी से हम दीपावली का त्योहार मना रहे हैं.

योगी आदित्यनाथ सियासत में कदम रखा तो गोरखपुर को अपनी कर्मभूमि बनाई. इसके बाद योगी वनटांगियों से संपर्क हुआ, तब से वो इनके विकास के लिए हरसंभव कोशिश में जुट गए और हर साल दिवाली उन्हीं के बीच मनाते हैं.

वनटांगिया लोगों को आजादी के इतने साल बाद भी किसी राजनीतिक दल या सरकारों ने सुध नहीं ली, उन्हें मुख्य धारा में जोड़ने का काम योगी आदित्यनाथ ने शुरू किया. योगी ने इनके बीच आना-जाना शुरू किया और तब से लगातार उनके बीच दिवाली मनाते आ रहे हैं.

बता दें कि गोरखपुर से करीब 11 किलोमीटर दूर पिपराइच रोड पर वनटांगिया गांव शुरू हो जाते हैं. गोरखपुर अलावा महाराजगंज और श्रावस्ती से लेकर गोंडा के कई गांवों में वनटांगिया समुदाय के लोग रहते हैं. मुख्यमंत्री ने पिछले साल गोरखपुर, महाराजगंज और गोंडा के ऐसे कई गांवों को राजस्व ग्राम घोषित किया था.   

हालांकि, वनटांगिया समुदाय के गांवों में स्कूल, अस्पताल, बिजली, सड़क, पानी जैसी कोई सुविधा थी ही नहीं. एक तरह से वनटांगिया खानाबदोश की जिंदगी जी रहे थे. उन्हें लोकसभा और विधानसभा में वोट देने का अधिकार 1995 में मिला. इससे आप इनकी उपेक्षा का अंदाजा लगा सकते हैं.

दरअसल करीब सौ साल पहले अंग्रेजों के शासन में पूर्वी उत्तर प्रदेश में रेल लाइन बिछाने, सरकारी विभागों की इमारत के लिए लकड़ी मुहैया कराने के लिए बड़े पैमाने पर जंगल काटे गए थे. अंग्रेजों को उम्मीद थी कि काटे गए पेड़ों की खूंट से फिर जंगल तैयार हो जाएंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ.

इसके बाद जंगल क्षेत्र में पौधों की देखरेख करने के लिए मजदूर रखे गए थे. इसके लिए 1920 में बर्मा (म्यांमार) में आदिवासियों द्वारा पहाड़ों पर जंगल तैयार करने के साथ-साथ खाली स्थानों पर खेती करने की पद्धति 'टोंगिया' को आजमाया, इसलिए इस काम को करने वाले श्रमिक वनटांगिया कहलाए.

वनटांगिया श्रमिक भूमिहीन थे, इसलिए अपने परिवार को साथ लेकर रहने लगे. दूसरी पीढ़ी में उनका अपने मूल गांव से संपर्क कट गया और वे जंगल के ही होकर रह गए. उन्हें खेती के लिए जमीन दी जाती थी, लेकिन यह जमीन वन विभाग की होती थी, उस पर इन श्रमिकों का कोई अधिकार नहीं था.

देश जब आजाद हुआ तो इनके गांवों को न तो राजस्व ग्राम की मान्यता मिली और न ही इन लोगों को संविधान के तहत नागरिकों के मूलभूत अधिकार दिए गए. मतलब वनटांगियों को वे अधिकार हासिल नहीं हुए जो देश के आम नागरिकों को मिले थे.

खलील ने खोल राज- इस वजह से इंटरनेशनल क्रिकेट में 'चल गया'

वेस्टइंडीज के खिलाफ दूसरे टी-20 मैच में नई गेंद संभालने वाले युवा तेज गेंदबाज खलील अहमद ने कहा कि उन्हें जिम्मेदारियां पसंद है और दबाव में उनका प्रदर्शन कभी खराब नहीं होता. खलील ने शाई होप और शिमरोन हेटमेयर के रूप में दो शुरुआती विकेट लेकर वेस्टइंडीज पर दबाव बनाया.

20 साल के खलील ने कहा ,‘मुझ पर ज्यादा जिम्मेदारी थी, क्योंकि मैं नई गेंद से गेंदबाजी कर रहा था. मुझे जिम्मेदारियां पसंद हैं. जब मैं छोटा था, तब हमेशा भारत के लिए खेलने का सपना देखता था. अब मेरा सपना पूरा हो गया है, अगर मैं दबाव लूंगा, तो अपनी क्षमता के अनुरूप नहीं खेल सकूंगा.’

खलील ने अपनी सफलता का श्रेय आईपीएल में अंतरराष्ट्रीय सितारों के साथ ड्रेसिंग रूम साझा करने के अनुभव को दिया. उन्होंने कहा, ‘आईपीएल में खेलने से काफी अनुभव मिलता है. आपको अपने खेल में ज्यादा बदलाव नहीं करने होते.’

उन्होंने कहा ,‘मेरा लक्ष्य भारत के लिए अच्छा खेलना है, जिसके लिए मुझे अपने खेल का लुत्फ उठाना होगा. मुझे अपनी क्षमता पर यकीन है. यदि आप खेल का मजा लेते हैं, तो अच्छे प्रदर्शन की भूख बढ़ती जाती है.’

राहुल का यह ट्वीट वित्त मंत्रालय के केंद्रीय बैंक को 3.6 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त रकम (सरप्लस अमाउंट) को ट्रांसफर करने के भेजे गए प्रस्ताव के संदर्भ में आया है. यह रकम रिजर्व बैंक की कुल जमा राशि 9.59 लाख करोड़ रुपये की एक तिहाई से भी ज्यादा है.

गौरतलब है कि केंद्र सरकार 19 नवंबर को होने आरबीआई बोर्ड बैठक में अपना अहम एजेंडा सामने करते हुए बोर्ड में रिजर्व बैंक गवर्नर की भूमिका को कम करने का काम कर सकती है. दरअसल, खबर के मुताबिक केंद्र सरकार और रिजर्व बैंक गवर्नर के बीच विवाद की अहम वजह केंद्रीय रिजर्व बैंक के पास मौजूद 9.6 ट्रिलियन (9.6 लाख करोड़) रुपये की रकम है.

इंडियन एक्सप्रेस ने सूत्रों के हवाले से कहा है कि केंद्र सरकार रिजर्व बैंक के पास पड़ी इस रिजर्व मुद्रा का लगभग एक-तिहाई हिस्सा लेना चाहती है . केन्द्र सरकार का रुख है कि इतनी बड़ी मात्रा में रिजर्व मुद्रा रखना रिजर्व बैंक की पुरानी और संकुचित धारणा है और इसे बदलने की जरूरत है.

खबर के मुताबिक केन्द्र सरकार रिजर्व बैंक से चाहती है कि उसे इस रिजर्व मुद्रा से 3.6 ट्रिलियन रुपये दिए जाएं. केन्द्र सरकार इस मुद्रा का संचार कर्ज और अन्य विकास कार्यों पर खर्च के जरिए अर्थव्यवस्था को मजबूत करना चाहती है.

Monday, November 5, 2018

OnePlus 6T का नया वेरिएंट हुआ लॉन्च, ये है खास

चीनी स्मार्टफोन मेकर वन प्लस ने हाल ही में OnePlus 6T लॉन्च कर दिया है. इसकी कीमत 37,999 रुपये रखी गई है और यह OnePlus 6 के मुकाबले ज्यादा महंगा नहीं है. कंपनी ने इसका एक नया कलर वेरिएंट लॉन्च किया है.

OnePlus 6T को मिडनाइट ब्लैक और मिरर ब्लैक मॉडल्स में लॉन्च किया गया है. अब इसमें एक नया कलर वेरिएंट ठंडर पर्पल जुड़ गया है. हालांकि इसे फिलहाल सिर्फ चीन में लॉन्च किया गया है. कंपनी ने सोमवार को OnePlus 6T लॉन्च किया है.

गौरतलब है कि नया कलर वेरिएंट सिर्फ 8GB रैम और 128GB इंटरनल मेमोरी वेरिएंट में ही उपलब्ध होगा. भारत और दूसरे ग्लोबल मार्केट में यह स्मार्टफोन दो कलर वेरिएंट्स – मिडनाइट ब्लैक उपलब्ध होगा. इस स्मार्टफोन के हार्डवेयर स्पेसिफिकेशन में कोई बदलाव नहीं किया गया है. फिलहाल भारत में यह कब लॉन्च होगा और इसकी कीमत क्या होगी इसकी कोई जानकारी नहीं है.


OnePlus 6T के स्पेसिफिकेशन्स

डुअल-सिम (नैनो) सपोर्ट वाला OnePlus 6T एंड्रॉयड 9.0 पाई बेस्ड OxygenOS पर चलता है. इसमें 19.5:9 रेश्यो के साथ 6.41-इंच फुल-HD+ (1080x2340 पिक्सल ) AMOLED डिस्प्ले दिया गया है. इस डिस्प्ले में प्रोटेक्शन के लिए कॉर्निंग गोरिल्ला ग्लास 6 लगाया गया है. इसमें वाटरड्रॉप-स्टाइल नॉच और थ्री-इन-वन एंबियंट लाइट सेंसर भी मौजूद है. OnePlus 6T में 6GB या 8GB LPDDR4X रैम के साथ ऑक्टा-कोर क्वॉलकॉम स्नैपड्रैगन 845 प्रोसेसर दिया गया है. इस स्मार्टफोन की खास बात ये है कि इसमें इन-डिस्प्ले फिंगरप्रिंट सेंसर दिया गया है.

फोटोग्राफी के सेक्शन की बात करें तो इसके रियर में डुअल कैमरा सेटअप दिया गया है. इसका प्राइमरी कैमरा 16 मेगापिक्सल का है, वहीं दूसरा कैमरा 20 मेगापिक्सल का है. ये 60fps तक 4K वीडियोज शूट कर सकता है. यहां बैक कैमरे के साथ डुअल-LED फ्लैश भी मौजूद है. साथ ही यहां OIS और EIS भी मौजूद है. दूसरी तरफ फ्रंट कैमरे की बात करें तो यहां 16 मेगापिक्सल का कैमरा मौजूद है. इसका अपर्चर f/2.0 है. फ्रंट कैमरे में भी EIS का सपोर्ट दिया गया है.

इसके फेस अनलॉक फीचर की बात करें तो कंपनी का दावा है कि ये फोन को 0.4 में ही अनलॉक कर देगा. इस स्मार्टफोन में 128GB या 256GB की इंटरनल मेमोरी दी गई है, जिसे कार्ड की मदद से बढ़ाया नहीं जा सकता है. कनेक्टिविटी के लिहाज से इसमें 4G VoLTE, Wi-Fi 802ac (डुअसल-बैंड, 2.4GHz और 5GHz), ब्लूटूथ v5.0, NFC, GPS/ A-GPS और एक USB टाइप-C (v2.0) का सपोर्ट मौजूद है.

इस बार की दिवाली कुछ खास होने वाली है. राम की नगरी अयोध्या दीपों के इस त्योहार को बड़ी धूमधाम से मनाने जा रही है. इस शानदार आयोजन को देखने के लिए दक्षिण कोरिया की प्रथम महिला किम जुंग-सूक भी अयोध्या में मौजूद रहेंगी.

मंगलवार की शाम को जब अयोध्या 3 लाख से अधिक दीपकों से जगमगाएगी और शोभायात्रा निकाली जाएगी तो पूरी दुनिया की नज़र अयोध्या पर ही होगी. इसके अलावा भी आज कई भव्य कार्यक्रम ऐसे होने जा रहे हैं, जिनसे इस बार की दिवाली खास होने वाली है.

अयोध्या की दिवाली इस बार त्रेतायुग जैसी होगी, जब पूरे शहर को सजा दिया गया है. शहर का चप्पा-चप्पा दीपकों से जगमगा रहा है, जिसका दीदार पूरी दुनिया करेगी.

मंगलवार को क्या कार्यक्रम होंगे खास?

दोपहर 3 से 3.15 बजे- सुदर्शन पटनायक की बनाई राम की बालू की प्रतिमा का यूपी के सीएम आदित्यनाथ, राज्यपाल राम नाईक, दक्षिण कोरिया की प्रथम महिला सूक राम बाजार में अनावरण करेंगे.

3.15 से 4 बजे - दक्षिण कोरिया की क्वीन हूह के मेमोरियल की आधारशिला रखी जाएगी.

4 से 4.30 बजे - राम और सीता की भूमिका निभा रहे कलाकार हेलिकॉप्टर से उतरेंगे. सीएम और गणमान्य लोग उनका स्वागत करेंगे.

4.30 से 6.00 बजे- राम कथा पार्क में मुख्य समारोह का आयोजन होगा

6.15 से 6.45 बजे- सरयू घाट पर आरती होगी.

6.45 से 7.30 बजे- राम की पैड़ी पर 3 लाख दीए जलाए जाएंगे. दीए जलाने का ये रिकॉर्ड गिनीज बुक में भी दर्ज हो सकता है.

7.30 से 7.45 बजे- राम की पैड़ी पर वाटर शो.

7.45 से 8 बजे- रामलीला में भाग ले रहे कलाकारों का सम्मान होगा.

8.00 से 8.15 बजे- पटाखेबाजी

8.30 से 10.30 बजे - इंडोनेशिया, रूस, ट्रिनिडाड के कलाकार रामलीला का मंचन करेंगे. इसके बाद कोरिया के कलाकार सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश करेंगे.

बनेगी राम की मूर्ति?

राम मंदिर को लेकर सीएम क्या घोषणा करने वाले हैं, इसे लेकर उत्सुकता बनी हुई है. कयास लगाए जा रहे हैं कि राम मंदिर के बारे में कोई घोषणा हो सकती है. दूसरी ओर ,कहा जा रहा है कि योगी की योजना बाहर आ चुकी है.

अयोध्या में सरयू के किनारे 151 मीटर ऊंची भगवान राम की तांबे की मूर्ति बनवाने की घोषणा योगी करने वाले हैं. इतना तो तय है कि योगी जो भी घोषणा करेंगे उसका समर्थन और विरोध होना तय है. क्योंकि संतों ने पहले ही ऐलान कर रखा है कि उन्हें ऊंची प्रतिमा नहीं राम मंदिर चाहिए.